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Indian Cricketer मंसूर अली खान पटौदी का जीवन परिचय- Mansoor Ali Khan Pataudi

Indian Cricketer मंसूर अली खान पटौदी का जीवन परिचय- Mansoor Ali Khan Pataudi Mansoor Ali Khan Pataudi Family of

Mansoor Ali Khan Pataudi

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Today, in this article - We will share with you Indian Cricketer मंसूर अली खान पटौदी का जीवन परिचय- Mansoor Ali Khan Pataudi.

Mansoor Ali Khan Pataudi

Mansoor Ali Khan Pataudi - मंसूर अली ख़ान पटौदी अथवा नवाब पटौदी भारतीय क्रिकेट टीम के भूतपूर्व कप्तान और महान खिलाड़ी थे। अपनी कलात्मक बल्लेबाजी से अधिक कप्तानी के कारण क्रिकेट जगत् में अमिट छाप छोडऩे वाले मंसूर अली ख़ान पटौदी ने भारतीय क्रिकेट में नेतृत्व कौशल की नई मिसाल और नए आयाम जोड़े थे।

एक दृष्टि में नवाब पटौदी

  • 13 दिसंबर 1961 :- टेस्ट पदार्पण इंग्लैंड के ख़िलाफ़ दिल्ली में 13 रन बनाए।
  • 10 जनवरी 1962 :- इंग्लैंड के ख़िलाफ़ टेस्ट का अपना पहला शतक (113 रन) चेन्नई में बनाया।
  • 23 मार्च 1962 :- बारबडोस टेस्ट में भारत के लिए पहली बार कप्तानी की, तब उनकी उम्र 21 साल ही थी।
  • 12-13 फरवरी 1964 :- कैरियर की सर्वश्रेष्ठ पारी 203 नाबाद इंग्लैंड के ख़िलाफ़ नईदिल्ली टेस्ट में खेली।
  • फरवरी-मार्च 1968 :- ड्युनेडिन टेस्ट में न्यूजीलैंड को हराकर पहली बार विदेश में 3-1 से सीरीज जीती।
  • 23 जनवरी 1975 :- वेस्टइंडीज के ख़िलाफ़ कैरियर के अंतिम टेस्ट (मुंबई) की दोनों पारियों में 9-9 रन बनाए।
  • 1961 से 1975 के बीच पटौदी ने 46 टेस्ट बनाए।
  • 1968 में विजडन क्रिकेटर ऑफ द ईयर
  • 1964 में अर्जुन पुरस्कार
  • 1967 में पद्मश्री से अंलकृत
  • आनंद बाज़ार पत्रिका समूह की खेल पत्रिका स्पोट्र्स वल्र्ड का एक दशक से भी ज़्यादा समय तक संपादन।
  • 2007 से बीसीसीआई के सलाहकार तथा आईपीएल गवर्निंग काउंसिल के सदस्य।
  • टीवी कॉमेंट्रेटर की भूमिका भी निभा चुके हैं।
  • 2007 से इंग्लैंड-भारत के बीच पटौदी ट्रॉफी के लिए टेस्ट सीरीज खेली जाती है।

मंसूर अली खान पटौदी का जन्म

पटौदी जूनियर जिन्हें दुनिया टाइगर पटौदी अथवा नवाब पटौदी के नाम से भी जानती है, का जन्म 5 जनवरी 1941 को मध्य प्रदेश के भोपाल के नवाब परिवार में हुआ था। यह दिन उन्हें खुशी के साथ गम भी दे गया था। पटौदी का जन्म भले ही भोपाल के शाही परिवार में हुआ लेकिन उन्हें विषम परिस्थितियों से जूझना पड़ा, चाहे वह निजी ज़िंदगी हो या फिर क्रिकेट।

पटौदी जब 11वां जन्मदिन मना रहे थे तब इसी दिन 1952 में उनके पिता पूर्व भारतीय कप्तान इफ्तिखार अली ख़ाँ पटौदी का दिल्ली में पोलो खेलते हुए दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया था।


इसके बाद जूनियर पटौदी को सभी भूल गये। चार साल बाद ही अखबारों में उनका नाम छपा जब विनचेस्टर की तरफ से खेलते हुए उन्होंने अपनी बल्लेबाजी से सभी को प्रभावित किया। अपने पिता के निधन के कुछ दिन बाद ही पटौदी इंग्लैंड आ गए थे। जब उन्होंने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट कैरियर शुरू किया तो 20 साल की उम्र में एक कार दुर्घटना में उनकी दाहिनी आंख की रोशनी चली गई।

मंसूर अली ख़ाँ पटौदी ने इसके बावजूद क्रिकेट की अपनी विरासत न सिर्फ बरकरार रखी बल्कि भारतीय क्रिकेट को भी नई ऊंचाईयां दी। वह भारत, दिल्ली, हैदराबाद, आक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और ससेक्स टीमों के लिए खेले थे।

मंसूर अली खान पटौदी का परिवार- Mansoor Ali Khan Family

मंसूर अली ख़ान पटौदी की शुरुआती शिक्षा-दीक्षा देहरादून के वेलहम बॉयज स्कूल में हुई और फिर उन्होंने अपनी ज़्यादातर पढ़ाई ब्रिटेन में की। वे इफ़्तिख़ार अली ख़ान पटौदी के बेटे थे।

जो पटौदी के आठवें नवाब थे। इफ़्तिख़ार अली ख़ान पटौदी सीनियर पटौदी के नाम से जाने जाते थे और उन्होंने भी भारतीय क्रिकेट टीम की कप्तानी की थी।

मंसूर अली खान पटौदी का विवाह- Marriage of Mansoor Ali Khan Pataudi

पटौदी ने शर्मिला टैगोर से शादी करने का फैसला 25 जुलाई, 1966 को लंदन में लिया था। इससे पहले 1 मार्च, 1967 को उनकी मंगनी हुई थी।

मशहूर अदाकारा और सेंसर बोर्ड की अध्यक्ष रह चुकीं अभिनेत्री शर्मिला से उनकी पहली मुलाकात उनके कोलकाता स्थित घर पर तब हुई थी, जब पटौदी अपने एक मित्र के साथ वहां एक कार्यक्रम में गए थे। इसमें तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. जाकिर हुसैन और इंदिरा गांधी भी शामिल हुईं थीं। 

पटौदी के परिवार में पत्नी बालीवुड अभिनेत्री शर्मिला टैगोर और तीन बच्चे हैं। उनका बेटा बालीवुड अभिनेता सैफ अली ख़ान और अभिनेत्री सोहा अली ख़ान हैं। उनकी एक बेटी सबा अली ख़ान ज्वैलरी डिजाइनर है।

मंसूर अली खान पटौदी का करियर राजनीति में- Mansoor Ali Khan Pataudi's career in politics

कई राजे-रजवाड़े की शख़्सियतों के सियासत के मैदान में उतरने पर उन्होंने भी राजनीति में आने का फैसला किया। विधान सभा का पहला चुनाव उन्होंने 1971 में पटौदी स्टेट (गुडग़ांव) से लड़ा, लेकिन यहां उन्हें शिकस्त मिली।

वर्ष 1991 में उन्होंने भोपाल से कांग्रेस के टिकट पर लोकसभा का चुनाव लड़ा तो भाजपा के सुशील चंद्र वर्मा से हार गए। इस चुनाव में खुद पूर्व प्रधानमंत्री और कांग्रेस अध्यक्ष राजीव गांधी ने उनके लिए चुनाव प्रचार किया था। उन्हें भोपाल से चुनाव लड़ाने का फैसला राजीव गांधी का था। इस चुनाव में बेगम आयशा सुल्तान यानी शर्मिला टैगोर ने प्रचार में कोई कसर नहीं छोड़ी थी। कई क्रिकेटर भी चुनाव प्रचार करने भोपाल आए थे।

मंसूर अली खान पटौदी क्रिकेट में- Mansoor Ali Khan Pataudi in cricket

पटौदी ने अपने पिता को अधिक खेलते हुए नहीं देखा था लेकिन उनका क्रिकेट प्यार तब लोगों को पता चला था जब वह अपने पिता के निधन के कुछ दिन बाद ही जहाज़ में इंग्लैंड जा रहे थे। इस जहाज़ में वीनू मांकड़ तथा वेस्टइंडीज के फ्रैंक वारेल और एवर्टन वीक्स जैसे खिलाड़ी भी थे और तब पटौदी ने जहाज़ के डेक पर उनके साथ क्रिकेट खेली थी।

इसके दस साल बाद युवा पटौदी किसी और के साथ नहीं बल्कि वारेल के साथ टेस्ट मैच में टॉस करने के लिए उतरे थे। वारेल ने इसके बाद कई अवसरों पर अपने इस युवा प्रतिद्वंद्वी की जमकर प्रशंसा की।

मंसूर अली खान पटौदी  सबसे युवा कप्तान- Mansoor Ali Khan Pataudi youngest captain

पटौदी ने मात्र 21 वर्ष 77 दिन की उम्र में भारतीय टीम की कप्तानी संभाली थी। पटौदी उस समय दुनिया के सबसे युवा कप्तान बने थे। टेस्ट क्रिकेट में सबसे कम उम्र में कप्तानी का रिकार्ड 2004 तक उनके नाम पर रहा। जिम्बाब्वे के तातैंडा तायबू ने 2004 में यह रिकार्ड अपने नाम किया था। 

पटौदी के कप्तान बनने के बाद भारतीय क्रिकेट की तस्वीर भी बदलने लगी। पटौदी को यह ज़िम्मेदारी वेस्टइंडीज दौरे में नियमित कप्तान नारी कांट्रेक्टर के सिर में चोट लगने के कारण दी गई थी।

उन्होंने एक आंख की रोशनी के बावजूद टेस्ट क्रिकेट में पांच शतक लगाए जिनमें कप्तान के रूप में उनकी पहली पूरी सीरीज 1963-64 में दिल्ली में इंग्लैंड के ख़िलाफ़ बनाया उनका उच्चतम स्कोर नाबाद 203 रन भी शामिल है। 

पटौदी ने उसी वर्ष आस्ट्रेलियाई टीम के ख़िलाफ़ दो अर्धशतक बनाए थे जिसकी बदौलत भारत ने मुंबई टेस्ट जीता था। उन्होंने चेन्नई टेस्ट में आस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ नाबाद शतक भी बनाया था। फिरोजशाह कोटला में ही उन्होंने 1965 में न्यूजीलैंड के ख़िलाफ़ 113 रन की जोरदार पारी खेली थी जिससे भारत सात विकेट से मैच जीतने में सफल रहा था।

पटौदी ने अपने 46 टेस्टों में से 40 में भारत का नेतृत्व किया था और नौ में भारत को जीत दिलाई थी जबकि 19 में हार मिली। लेकिन यह नहीं भूलना चाहिए कि पटौदी से पहले भारतीय टीम ने जो 79 मैच खेले थे उनमें से उसे केवल आठ में जीत मिली थी और 31 में हार। यही नहीं इससे पहले भारत विदेशों में 33 में से कोई भी टेस्ट मैच नहीं जीत पाया था।

साहसी बल्लेबाज़

पटौदी साहसिक बल्लेबाज़ी के लिए जाने जाते थे और फील्डरों के ऊपर से शाट खेलने से नहीं चूकते थे। वह परंपरागत सोच में यकीन नहीं रखने वाले कप्तान थे और हमेशा कुछ अलग करने की कोशिश में रहते थे। एक कार दुर्घटना में उनकी दाईं आंख की रोशनी पर असर पडा था जिससे उनका क्रिकेट करियर प्रभावित हुआ।

मैच रैफरीक्रिकेट से सन्न्यास लेने के बाद वह 1993 से 1996 तक आईसीसी मैच रैफरी भी रहे थे जिसमें उन्होंने दो टेस्ट और 10 वनडे में यह भूमिका निभाई थी। वह 2005 में तब एक विवाद में भी फंस गए थे जब उन्हें लुप्त प्रजाति काले हिरण के अवैध शिकार के लिए गिरफ्तार किया गया था।

वर्ष 2008 में पटौदी इंडियन प्रीमियर लीग [आईपीएल] की संचालन परिषद में भी नियुक्त किए गए थे और दो साल तक इस पद पर बने रहने के बाद 2010 में उन्होंने बीसीसीआई के इस पद की पेशकश को ठुकरा दिया था।

मंसूर अली खान पटौदी का निधन- Mansoor Ali Khan Pataudi Death

Mansoor Ali Khan Pataudi

मंसूर अली ख़ान पटौदी का फेफडों के संक्रमण के कारण 22 सितंबर 2011 को 70 वर्ष की उम्र में निधन हुआ था। 23-09-2011 को मंसूर अली को गुड़गांव (हरियाणा) ज़िले के उनके पुश्‍तैनी गांव पटौदी में पटौदी महल परिसर स्थित क़ब्रगाह में जहां दफनाया गया, वहां पास में ही उनके दादा-दादी और पिता की क़ब्र है।

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