पहले अंतरराष्ट्रीय नेत्रहीन छात्र श्रीकांत बोला की कहानी - Srikanth Bolla Story in Hindi



श्रीकांत बोला की कहानी - Srikanth Bolla Story in Hindi


श्रीकांत बोल्ला बोल्टन इंडस्ट्रीज के संस्थापक हैं। वह मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में ब्रेन एंड कॉग्निटिव साइंस एंड बिजनेस के पहले अंतरराष्ट्रीय नेत्रहीन छात्र हैं।

Srikanth Bolla Story in Hindi


जन्म: 1992 (उम्र 27 वर्ष), मछलीपट्टनम
अल्मा मेटर: मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी

Starting Life of Srikanth Bolla/श्रीकांत बोला शुरुवाती जीवन -



श्रीकांत बचपन से ही पढ़ने में तेज थे। परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक न होने के बावजूद श्रीकांत ने 10वीं अच्छे अंकों से उत्तीर्ण की। उनकी मुश्किलें यहीं खत्म नहीं हुई, वह दसवीं के बाद साइंस पढ़ना चाहते थे। लेकिन उनके ब्लाइंड होने के कारण, उन्हें इसकी इजाज़त नहीं मिली।

श्रीकांत भी कहां हार मानने वालों में से थे। कई महीनों की लड़ाई लड़ने के बाद आखिरकार श्रीकांत को साइंस पढ़ने की इजाज़त मिली और इसी के साथ श्रीकांत देश के पहले ब्लाइंड बने, जिन्हें दसवीं के बाद साइंस पढ़ने की अनुमति मिली। इसके बाद श्रीकांत ने दोबारा पीछे मुड़कर नहीं देखा। श्रीकांत को अपनी स्कूली पढ़ाई पूरी करते ही अमेरिका के मैसाचुसेट्स प्रौद्योगिकी संस्थान (MIT) में प्रवेश मिला। इसी के साथ ही श्रीकांत देश के पहले ऐसे ब्लाइंड स्टूंडेंट बने, जिन्होंने MIT से शिक्षा प्राप्त की।

अमेरिका से अपनी शिक्षा लेने के बाद श्रीकांत ने हैदराबाद में अपनी कंपनी की शुरुआत की। श्रीकांत ने लोगों के खाने-पीने के समान की पैकिंग के लिए कंज्यूमर फूड पैकेजिंग कंपनी का गठन किया। इस कंपनी की शुरुआत श्रीकांत ने 8 लोगों की एक टीम से की। उन्होंने इस कंपनी में सबसे पहले आस-पास के बेरोजगार लोगों को जोड़ा। जिसमें श्रीकांत ने ब्लाइंड लोगों को काम दिया। जब श्रीकांत की कंपनी अच्छी रफ़्तार पकड़ने लगी तो फंडिंग की दिक्कत आना शुरू हुई।

श्रीकांत बोला की मेहनत/Srikanth Bolla Hardwork


लेकिन श्रीकांत इससे पीछे हटने वाले थोड़ी थे, उन्होंने कई फंडिंग कंपनियों से और निजी बैंकों से फंड जुटाकर अपने काम को आगे बढ़ाया। श्रीकांत की कंपनी ने फर्श से अर्श तक का सफर तय किया। आज श्रीकांत की कंपनी के तेलंगाना और हैदराबाद में चार प्लांट है, जिसमें हज़ारों की संख्या में कर्मचारी कार्यरत है।



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