जेसिका कॉक्स की कहानी - Jessica Cox In Hindi

जेसिका कॉक्स की कहानी - Jessica Cox Biography In Hindi








जेसिका कॉक्स दुनिया की पहली लाइसेंस प्राप्त आर्मलेस पायलट हैं, साथ ही अमेरिकन ताइक्वांडो एसोसिएशन में पहली आर्मलेस ब्लैक-बेल्ट भी हैं। वह एक दुर्लभ जन्म दोष के कारण हथियारों के बिना पैदा हुआ था। 

Jessica Cox In Hindi





जन्म: 2 फरवरी 1983 (उम्र 36 वर्ष), सिएरा विस्टा, एरिज़ोना, संयुक्त राज्य
राष्ट्रीयता: अमेरिकी
पति : पैट्रिक चैंबरलेन (एम। 2012)
माता-पिता: विलियम कॉक्स, इनज़ कॉक्स
फिल्में और टीवी शो: राइट फुटेड
पुस्तकें: अपनी सीमाएँ निरस्त करें: उड़ान का सूत्र आपको सफलता की ओर ले जाता है और आपको अगले क्षितिज पर ले जाता है



जेसिका कॉक्स ने साइकोलॉजी में बैचलर डिग्री के साथ कम्युनिकेशन में 2005 में एरिज़ोना यूनिवर्सिटी से अपना ग्रेजुएशन पूरा किया है। 14 साल की उम्र तक कॉक्स ने कभी भी मानवनिर्मित नकली हाथों का उपयोग नही किया। वह अपने पैरों को ही अपने हाथों की तरह उपयोग करती है। वह कभी खुद को दूसरो से कम नही समझती थी बल्कि वह वो सब कुछ कर सकती है जो हाथ होकर दुसरे इंसान करते है, जैसे कि वह कार चलाती है बल्कि उनके पास ड्राइविंग लाइसेंस भी है और साथ ही वह कीबोर्ड पर एक मिनट में 25 शब्द भी टाइप कर लेती है। इसके साथ ही वह एक सर्टिफाइड स्कूबा (SCUBA) गोताखोर भी है।



जेसिका कॉक्स अविश्वसनीय करियर :-


2005 में पहली बार कॉक्स ने सिंगल इंजन वाला एयरप्लेन चलाया था। बाद में तीन महीनो के प्रशिक्षण के बाद कॉक्स को अपना पायलट सर्टिफिकेट 10 अक्टूबर 2008 में मिला और लाइट-स्पोर्ट एयरक्राफ्ट को 10000 फीट तक चलाने की इजाजत उन्हें मिल गयी। उन्होंने फ्लाइट का प्रशिक्षण स्कालरशिप से मिलने वाले पैसो से लिया और एक प्रोफेशनल पायलट की तरह वह अपने पैरों की सहायता से एयरप्लेन चलाने लगी थी।

सन 1940 में ERCO 415-C Ercoupe ने कॉक्स की हालत को देखते हुए अपने प्लेन में कुछ बदलाव करने की ठानी और अंततः उन्होंने एक ऐसे प्लेन की खोज की जिसे आसानी से एक पैर की सहायता से ही नियंत्रित किया जा सके। इससे एयरप्लेन उड़ाने में कॉक्स को काफी सहायता होती थी और वह आसानी से औरो की तरह एयरप्लेन उड़ाती थी।

10 साल की उम्र से ही कॉक्स ने ताइक्वांडो(कराटे के समान एक आधुनिक कोरियाई मार्शल आर्ट) का प्रशिक्षण अपनी स्थानिक स्कूल सिएरा विस्टा से लेना शुरू कर दिया था। 14 साल की उम्र में उन्होंने अपना पहला ब्लैक बेल्ट भी जीता। अपने प्रशिक्षण में कॉक्स ने काफी नयी-नयी तकनीको को खोज निकाला था जैसे कि सामने वाले पर हाथों से प्रहार करने की बजाये वह पैरों से प्रहार करती थी, इसी के चलते ATA चैंपियनशिप में कॉक्स ने अपना दूसरा और तीसरा ब्लैक बेल्ट भी जीत लिया। सन 2014 में एरिज़ोना स्टेट चैंपियन का टाइटल भी उन्हें दिया गया था। खेल के दौरान देखा गया था कि कॉक्स ने कभी भी अपने आप को दूसरो के मुकाबले कम नही समझा।

जेसिका कॉक्स एक प्रेरणादायक वक्ता भी है 20 से ज्यादा देशों में उन्होंने अपनी प्रेरणादायक कहानियां बताई है और भाषण दिए है। जेसिका कॉक्स का जन्म बिना हाथों के हुआ था। डॉक्टर को भी उनके जन्म के समय पता नही था कि उनका जन्म ऐसे क्यू हुआ। लेकिन जेसिका ने कभी इसे अपनी कमजोरी नही माना। जेसिका ने अपने पैरों को अपना हाथ समझकर अपने लक्ष्य को हासिल करती गयी और आज दुनियाभर के लोगों के साथ अपनी कहानी को बता रही है।


1983 में एरिज़ोना के सिएरा विस्टा में जन्मी जेसिका ने पैरों की सहायता से अपनी जिंदगी को जीना सिखा। जन्म के बाद उनके मन में काफी प्रश्न भी आये होंगे की क्या वह दुसरे साधारण लोगों की तरह जिंदगी को जी पाएंगी। 

लेकिन जेसिका के पिता ने कहा था कि अपने जन्म को लेकर कभी भी जेसिका ने एक आसू तक नही बहाया। बल्कि जेसिका को काफी आत्मविश्वास था और इसके बाद अपने परिवार और माता-पिता की सहायता से उनका आत्मविश्वास और बढ़ा और जेसिका भी अपने पैरों को अपने हाथों की तरह इस्तेमाल करने लगी थी।
बचपन में ही जेसिका ने डांस सीख लिया था। और जब पहली बार परफॉरमेंस करने की बारी आई तो उन्होंने पिछली कतार में परफॉर्म करने की ठानी लेकिन उनके शिक्षक ने उन्हें कहा की डांस में कोई पिछली कतार नही होती है। इसीलिये दुसरे डांसर के साथ जेसिका भी परफॉर्म करने लगी थी। और जब उनकी परफॉरमेंस ख़त्म हुई तो दर्शको ने जेसिका के साहस और जज्बे को देखते हुए खड़े होकर उनका तालियों से स्वागत किया और 14 साल की उम्र में उनके लिए यह पल उनकी जिंदगी के कीमती पलो में से एक रहा होगा।




बाद में अचानक ही जेसिका के माता-पिता की मुलाकात ताइक्वांडो के प्रशिक्षक जिम कन्निंघम से हुई। जेसिका के माता-पिता ने प्रशिक्षक को जेसिका की जन्म अवस्था के बारे में बताया तो प्रशिक्षक ने जेसिका को शारीरिक रूप से मजबूत बनाने की ठानी, और तभी से जेसिका ने ताइक्वांडो का प्रशिक्षण लेना शुरू किया। और सिर्फ 14 साल की उम्र में ही जेसिका ने इंटरनेशनल ताइक्वांडो फेडरेशन में ब्लैक बेल्ट जीता।
हाई स्कूल से ग्रेजुएट होने के बाद जेसिका ने यूनिवर्सिटी ऑफ़ एरिज़ोना से साइकोलॉजी में बैचलर की डिग्री प्राप्त की। जब डिग्री की बारे में वह बोल रही थी तब उन्होंने खुलकर बताया की उनके आस-पास का लोगों का उनके जीवन पर काफी प्रभाव पड़ा।




अपने महाविद्यालयीन जीवन में उन्होंने ATA मार्शल आर्ट्स क्लब की स्थापना की और बच्चो को ताइक्वांडो का प्रशिक्षण देने लगी थी। ताइक्वांडो में ब्लैक बेल्ट हासिल करने के बावजूद जेसिका ने कभी भी ताइक्वांडो का प्रशिक्षण लेना नही छोड़ा। और उनके इसी अथक प्रयास के चलते ATA में ब्लैक बेल्ट जीतने वाली वह पहली बिना हाथों वाली खिलाड़ी बनी।
जेसिका कॉक्स को सबसे ज्यादा मशक्कत हवाई जवाज को कैसे उड़ाते है, उसे सीखने में करनी पड़ी। इसके लिये उन्हें तीन राज्य, चार एयरप्लेन और दो फ्लाइट इंस्ट्रक्टर से होकर गुजरना पड़ा था और अंत में उनकी परिस्थिती को देखते हुए उनके लिए 1946 का 415C Ercoupe एयरप्लेन सही साबित हुआ। और इसी के साथ सिर्फ अपने पैरों की सहायता से एयरप्लेन चलाने वाली वह दुनिया की पहली महिला बनी और उन्होंने गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड भी बना लिया।


आज जेसिका एक प्रेरणादायक वक्ता की भूमिका निभा रही है। अपनी कहानी को लोगों तक पहुंचाने के लिये वह दुनियाभर में अलग-अलग देशों की यात्रा कर रही है। और लोगों को अपने प्रेरणादायक भाषणों से प्रेरित कर रही है। बशीर ने क्या खूब कहा है इन लाइन्स में मंजिल तक पहुंचने का जो जुनून है वो साफ़ नजर आता है कि एक राही किसी पथ की कठिनाइयों व थकावट को नजर अंदाज़ कर के बस अपनी मंजिल की तरफ बढ़ता चला जा रहा है।


ये 100% सही है कि जिंदगी की कठिनाइयां कभी लक्ष्य की प्राप्ति में बाधक नही बनती बल्कि अगर कुछ बाधक बनता है तो वो है आपका अपने लक्ष्य के प्रति अविश्वास और अपने लक्ष्य के प्रति जुनून की कमी। यदि आपके जीवन का उद्देश्य और लक्ष्य साफ़ है और उसे पाने के लिये आपके अंदर एक जुनून है तो फिर जिंदगी की हर शारीरिक और आर्थिक समस्या भी आपके लक्ष्य के सामने छोटी हो जाती है और आप हर उस तरह की सफलता को हासिल कर सकते है जिसे आप हासिल करना चाहते है।






मुझे आशा है कि आपको जेसिका कॉक्स की जीवनी पसंद आएगी
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