[Trending]_$type=ticker$meta=0$readmore=0$snippet=0$columns=4

बाल गंगाधर तिलक की जीवनी - Bal Gangadhar Tilak In Hindi

बाल गंगाधर तिलक की जीवनी - Bal Gangadhar Tilak In Hindi दैनिक अपडेट के लिए StoryBookHindi अनुसरण करो मुझे आशा है कि आपको सरदार वल्लभभाई पटेल की जीवनी पसंद आएगी बाल गंगाधर तिलक की जीवनी - Bal Gangadhar Tilak In Hindi बाल गंगाधर तिलक अपने पिता की मृत्यु के बाद 16 वर्ष की उम्र में अनाथ हो गए। उन्होंने तब भी बिना किसी व्यवधान के अपनी शिक्षा जारी रखी और अपने पिता की मृत्यु के चार महीने के अंदर मैट्रिक की परीक्षा पास कर ली।

बाल गंगाधर तिलक की जीवनी - Bal Gangadhar Tilak In Hindi 







केशव गंगाधर तिलक के रूप में पैदा हुए बाल गंगाधर तिलक एक भारतीय राष्ट्रवादी, शिक्षक, वकील और एक स्वतंत्र कार्यकर्ता थे। वह भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के पहले नेता थे। ब्रिटिश औपनिवेशिक अधिकारियों ने उन्हें "भारतीय अशांति का जनक" कहा।


Bal Gangadhar Tilak In Hindi
Bal Gangadhar Tilak



जन्म: 23 जुलाई 1856, चिखली, महाराष्ट्र
निधन: 1 अगस्त 1920, मुंबई
उपनाम: लोकमान्य तिलक
पूरा नाम: केशव गंगाधर तिलक
माता-पिता: पार्वती बाई गंगाधर, श्री गंगाधर तिलक


जीवन परिचय : 


Bal Gangadhar Tilak Hindi


बाल गंगाधर तिलक का जन्म 23 जुलाई, सन् 1856 ई. को भारत के रत्नागिरि नामक स्थान पर हुआ था। इनका पूरा नाम 'लोकमान्य श्री बाल गंगाधर तिलक' था। तिलक का जन्म एक सुसंस्कृत, मध्यमवर्गीय ब्राह्मण परिवार में हुआ था। उनके पिता का नाम 'श्री गंगाधर रामचंद्र तिलक' था। श्री गंगाधर रामचंद्र तिलक पहले रत्नागिरि में सहायक अध्यापक थे और फिर पूना तथा उसके बाद 'ठाणे' में सहायक उपशैक्षिक निरीक्षक हो गए थे। 

वे अपने समय के अत्यंत लोकप्रिय शिक्षक थे। उन्होंने 'त्रिकोणमिति' और 'व्याकरण' पर पुस्तकें लिखीं जो प्रकाशित हुईं। तथापि, वह अपने पुत्र की शिक्षा-दीक्षा पूरी करने के लिए अधिक समय तक जीवित नहीं रहे। लोकमान्य तिलक के पिता 'श्री गंगाधर रामचंद्र तिलक' का सन् 1872 ई. में निधन हो गया।



शिक्षा : 

बाल गंगाधर तिलक अपने पिता की मृत्यु के बाद 16 वर्ष की उम्र में अनाथ हो गए। उन्होंने तब भी बिना किसी व्यवधान के अपनी शिक्षा जारी रखी और अपने पिता की मृत्यु के चार महीने के अंदर मैट्रिक की परीक्षा पास कर ली। 

वे 'डेक्कन कॉलेज' में भर्ती हो गए फिर उन्होंने सन् 1876 ई. में बी.ए. आनर्स की परीक्षा वहीं से पास की सन् 1879 ई. में उन्होंने बंबई विश्वविद्यालय से एल.एल.बी. की परीक्षा पास की और क़ानून की पढ़ाई करते समय उन्होंने 'आगरकर' से दोस्ती कर ली जो बाद में 'फ़र्ग्युसन कॉलेज' के प्रिंसिपल हो गए। 

दोनों दोस्तों ने इस बात पर विचार करते हुए अनेक रातें गुजारीं कि वे देशवासियों की सेवा की कौन-सी सर्वोत्तम योजना बना सकते हैं। अंत में उन्होंने संकल्प किया कि वे कभी सरकारी नौकरी स्वीकार नहीं करेंगे तथा नई पीढ़ी को सस्ती और अच्छी शिक्षा प्रदान करने के लिए एक प्राइवेट हाईस्कूल और कॉलेज चलाएँगे। उनके साथी छात्र इन आदर्शवादी बातों पर उनकी हँसी उड़ाते थे। लेकिन इन उपहासों या बाहरी कठिनाइयों का कोई असर उन दोनों उत्साही युवकों पर नहीं हुआ।


सार्वजनिक सेवा : 


Bal Gangadhar Tilak In Hindi


तिलक जी ने स्कूल के भार से स्वयं को मुक्त करने के बाद अपना अधिकांश समय सार्वजनिक सेवा में लगाने का निश्चय किया। अब उन्हें थोड़ी फुरसत मिली थी। इसी समय लड़कियों के विवाह के लिए सहमति की आयु बढ़ाने का विधेयक वाइसराय की परिषद के सामने लाया जा रहा था। 

तिलक पूरे उत्साह से इस विवाद में कूद पड़े, इसलिए नहीं कि वे समाज-सुधार के सिद्धांतों के विरोधी थे, बल्कि इसलिए कि वे इस क्षेत्र में ज़ोर-जबरदस्ती करने के विरुद्ध थे। सहमति की आयु का विधेयक, चाहे इसके उद्देश्य कितने ही प्रशंसनीय क्यों न रहे हों, वास्तव में हिन्दू समाज में सरकारी हस्तक्षेप से सुधार लाने का प्रयास था। 

अत: 

समाज-सुधार के कुछ कट्टर समर्थक इसके विरुद्ध थे। इस विषय में तिलक के दृष्टिकोण से पूना का समाज दो भागों, कट्टरपंथी और सुधारवादियों में बँट गया। दोनों के बीच की खाई नए मतभेदों एवं नए झगड़ों के कारण बढ़ती गई।


समाचार पत्र का प्रकाशन : 


इसके बाद उन्होंने दो साप्ताहिक समाचार पत्रों, मराठी में केसरी और अंग्रेज़ी में द मराठा, के माध्यम से लोगों की राजनीतिक चेतना को जगाने का काम शुरू किया। इन समाचार पत्रों के ज़रिये ब्रिटिश शासन तथा उदार राष्ट्रवादियों की, जो पश्चिमी तर्ज़ पर सामाजिक सुधारों एवं संवैधानिक तरीक़े से राजनीतिक सुधारों का पक्ष लेते थे, 

कटु आलोचना के लिए वह विख्यात हो गए। उनका मानना था कि सामाजिक सुधार में जनशक्ति खर्च करने से वह स्वाधीनता के राजनीतिक संघर्ष में पूरी तरह नहीं लग पाएगी। उन पत्रों ने देसी पत्रकारिता के क्षेत्र में शीघ्र ही अपना विशेष स्थान बना लिया। विष्णु शास्त्री चिपलूनकर ने इन दोनों समाचारपत्रों के लिए दो मुद्रणालय भी स्थापित किए।

छपाई के लिए 'आर्य भूषण' और 'ललित कला' को प्रोत्साहन देने के वास्ते 'चित्रशाला' दी गई। इन गतिविधियों में कुछ समय के लिए पाँचों व्यक्ति पूरी तरह व्यस्त हो गए। उन्होंने इन कार्यों को आगे बढ़ाया। 'न्यू इंग्लिश स्कूल' ने शीघ्र ही स्कूलों में पहला स्थान प्राप्त कर लिया। 

'मराठा' और 'केसरी' भी डेक्कन के प्रमुख समाचारपत्र बन गए। देशप्रेमियों के इस दल को शीघ्र ही अग्निपरीक्षा में होकर गुजरना पड़ा। केसरी और मराठा में प्रकाशित कुछ लेखों में कोल्हापुर के तत्कालीन महाराजा शिवाजी राव के साथ किए गए व्यवहार की कठोर आलोचना की गई थी। 

राज्य के तत्कालीन प्रशासक 'श्री एम. डब्ल्यू. बर्वे' ने इस पर मराठा और केसरी के संपादक के रूप में क्रमश: तिलक और श्री आगरकर के विरुद्ध मानहानि का मुक़दमा चला दिया। कुछ समय बाद इन लोगों की कठिनाइयाँ और बढ़ गईं क्योंकि जब यह मामला विचाराधीन था, तभी 'श्री वी.के. चिपलूनकर' का देहांत हो गया। उसके बाद 'तिलक' और 'आगरकर' को दोषी पाया गया। उन्हें चार-चार महीने की साधारण क़ैद की सज़ा सुना दी गई।

स्वतंत्रता संग्राम , नरम दल के लिए तिलक के विचार : भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के नरम दल के लिए तिलक के विचार ज़रा ज़्यादा ही उग्र थे। नरम दल के लोग छोटे सुधारों के लिए सरकार के पास वफ़ादार प्रतिनिधिमंडल भेजने में विश्वास रखते थे। 

तिलक का लक्ष्य स्वराज था, छोटे- मोटे सुधार नहीं और उन्होंने कांग्रेस को अपने उग्र विचारों को स्वीकार करने के लिए राज़ी करने का प्रयास किया। इस मामले पर सन् 1907 ई. में कांग्रेस के 'सूरत अधिवेशन' में नरम दल के साथ उनका संघर्ष भी हुआ। 

राष्ट्रवादी शक्तियों में फूट का लाभ उठाकर सरकार ने तिलक पर राजद्रोह और आतंकवाद फ़ैलाने का आरोप लगाकर उन्हें छह वर्ष के कारावास की सज़ा दे दी और मांडले, बर्मा, वर्तमान म्यांमार में निर्वासित कर दिया। 

'मांडले जेल' में तिलक ने अपनी महान कृति 'भगवद्गीता - रहस्य' का लेखन शुरू किया, जो हिन्दुओं की सबसे पवित्र पुस्तक का मूल टीका है। तिलक ने भगवद्गीता के इस रूढ़िवादी सार को ख़ारिज कर दिया कि यह पुस्तक सन्न्यास की शिक्षा देती है; उनके अनुसार, इससे मानवता के प्रति नि:स्वार्थ सेवा का संदेश मिलता है।


लेखक के रूप में : 

Bal Gangadhar Tilak In Hindi
Bal Gangadhar Tilak


उन्होंने अब अपने ख़ाली समय का उपयोग किसी अच्छे कार्य में लगाने का संकल्प लेकर उसे अपनी प्रिय पुस्तकों भगवद्गीता और ऋग्वेद के पठन-पाठन में लगाया। वेदों के काल-निर्धारण से संबंधित अपने अनुसंधान के परिणामस्वरूप उन्होंने वेदों की प्राचीनता पर एक निबंध लिखा। 

जो गणित-ज्योतिषीय अवलोकन के प्रमाणों पर आधारित था। उन्होंने इस निबंध का सारांश इंटरनेशनल कांग्रेस ऑफ ओरिएंटलिस्ट के पास भेजा जो सन् 1892 ई. में लंदन में हुई। अगले वर्ष उन्होंने इस पूरे निबंध को पुस्तकाकार में दि ओरिऑन या दि रिसर्च इनटु द एंटिक्विटी ऑफ द वेदाज शीर्षक के अंतर्गत प्रकाशित किया। 



उन्होंने इस पुस्तक में ओरिऑन की ग्रीक परंपरा और 'लक्षत्रपुंज' के संस्कृत अर्थ 'अग्रायण या अग्रहायण' के बीच संबंध को ढूंढा है। क्योंकि अग्रहायण शब्द का अर्थ वर्ष का प्रारंभ है, वे इस नतीजे पर पहुँचते हैं कि ऋग्वेद के सभी स्रोत जिनमें इस शब्द का संदर्भ है या इसके साथ जो भी विभिन्न परंपराएँ जुड़ी थीं, 

की रचना ग्रीक लोगों के हिंदुओं से पृथक होने से पूर्व की गई होगी। यह वह समय रहा होगा, जब वर्ष का प्रारंभ सूर्य के ओरिऑन या मृगशिरा नक्षत्र पुंज में रहते समय अर्थात ईसा से 4000 वर्ष पहले हुआ होगा। इस पुस्तक की प्रशंसा यूरोप और अमेरिकी विद्वानों ने की। अब यह कहा जा सकता है कि तिलक के निष्कर्षों को लगभग सभी ने स्वीकार कर लिया है।

अनेक प्राच्यविदों, जैसेकि - मैक्समुलर, वेबर, जेकोबी, और विटने ने लेखक की विद्वता और मौलिकता को स्वीकार किया है। पुस्तक के प्रकाशन के बाद तिलक ने कुछ समय तक प्रोफेसर मैक्समुलर और वेबर के साथ पुस्तक में उठाए गए कुछ भाषा-विज्ञानीय प्रश्नों पर दोस्ताना पत्र व्यवहार किया। इसके परिणामस्वरूप दोनों पक्ष इस बात पर सहमत हुए कि इस विषय के पक्ष और विपक्ष में बहुत कुछ कहा जा सकता है।

मृत्यु : 

सन 1919 ई. में कांग्रेस की अमृतसर बैठक में हिस्सा लेने के लिए स्वदेश लौटने के समय तक तिलक इतने नरम हो गए थे कि उन्होंने 'मॉन्टेग्यू- चेम्सफ़ोर्ड सुधारों' के ज़रिये स्थापित 'लेजिस्लेटिव काउंसिल' (विधायी परिषदों) के चुनाव के बहिष्कार की गाँधी की नीति का विरोध नहीं किया।

इसके बजाय तिलक ने क्षेत्रीय सरकारों में कुछ हद तक भारतीयों की भागीदारी की शुरुआत करने वाले सुधारों को लागू करने के लिए प्रतिनिधियों को सलाह दी कि वे उनके प्रत्युत्तरपूर्ण सहयोग' की नीति का पालन करें। 

लेकिन नए सुधारों को निर्णायक दिशा देने से पहले ही 1 अगस्त, सन् 1920 ई. में बंबई में तिलक की मृत्यु हो गई।



  • यह भी पढ़ाइये

  1. राजीव गाँधी जीवनी हिंदी
  2. मदर टेरेसा की जीवनी
  3. सरदार वल्लभभाई पटेल की जीवनी




दैनिक अपडेट के लिए StoryBookHindi  Subscribe करो 
मुझे आशा है कि आपको सरदार वल्लभभाई पटेल की जीवनी पसंद आएगी
बाल गंगाधर तिलक की जीवनी - Bal Gangadhar Tilak In Hindi 



No comments:

Name

Akbar Birbal Kahani,12,Akbar Birbal ke kisse,4,Aladdin Story,11,Albert Einstein,1,Animals,4,Astronaut,3,Bachpan Shayari,1,Bal Gangadhar Tilak,1,Bhagat Singh Poetry,1,Bhoot ki Daravni Kahani,1,Biography,205,Birds,4,Bollywood,23,Books,1,Business,10,Chanakya,2,City,1,Country,7,dadimaa ki kahaniya,1,Discovery Ghosts,6,E-Commerce,1,Economics,1,Education,1,Entrepreneur,21,Facts,114,Festival,1,Foods,1,Founders,21,Free Ebooks,2,Freedom Fighters,11,Fruits,1,Full Hindi Story,6,Funny Story,3,Games,1,Google,1,Harivansh Rai Bachchan,3,Haunted Place,4,Heavy Rain,3,Henry ford Biography,1,Hindi,6,Hindi Essay,13,Hindi Kahani,18,Hindi Moral Kahaniya,2,Hindi Poem,1,Hindi Poetry,21,Hindi Short Story,3,Hindi Story,6,History,26,Horror Story,33,How To,1,India,62,Indian Players,18,Indian Politicians,13,Information,34,Inspirational Stories,4,Inventors,5,Jack Ma Biography,1,Kahaniyan,12,Kavi Biography,2,Kids Story,4,Koi Deewana kehta hai Poem,1,Kumar Vishwas,2,Kumar Vishwas Poem,2,Lakes,1,Latest,749,Life Story,2,Lionel Messi Biography,1,Love Story,7,Mahabharat,4,Mahatma Gandhi,2,Meditation,1,Money,2,Monument,4,Mother Teresa Biography,1,Motivational,2,Motivational Poetry,1,Motivational speaker,3,Motivational Story,21,Mystery,20,Narendra Modi,8,Online,1,Personality Development,21,Place To Visit,1,Poet,1,Positive Story,2,Prime Minister,6,Proverb Story,5,Proverbs,1,Psychology,1,Quotes,21,Rahat Indori Poetry,1,Rainy Night At Window,1,Rajendra Prasad Biography Biography,1,Rajiv Gandhi Biography,1,Religious,29,Ritesh Agarwal,1,Rivers,21,Sachin Tendulkar,1,Sad Poetry,3,Saving Tips,1,Scientist,17,Self Confidence,2,Shikshaprad Kahaniyan,8,Sports,19,States,1,Story,8,Struggle story,5,Success Story,45,Technology,4,Temples,5,Tenali Raman Hindi Story,11,The Great Khali Biography,1,Tips,21,Top Stories,207,Tourist Place,10,Travel,1,Vikram Betal Story,1,War,2,Waterfall,1,Websites,1,Wrestler,1,Writer,4,Yahya Bootwala Poetry,2,Zakir Khan,4,Zindagi Poetry,3,कहावतों की कहानियाँ,1,भारतीय वैज्ञानिक,1,शिक्षाप्रद कहानियाँ,23,
ltr
item
StoryBookHindi: बाल गंगाधर तिलक की जीवनी - Bal Gangadhar Tilak In Hindi
बाल गंगाधर तिलक की जीवनी - Bal Gangadhar Tilak In Hindi
बाल गंगाधर तिलक की जीवनी - Bal Gangadhar Tilak In Hindi दैनिक अपडेट के लिए StoryBookHindi अनुसरण करो मुझे आशा है कि आपको सरदार वल्लभभाई पटेल की जीवनी पसंद आएगी बाल गंगाधर तिलक की जीवनी - Bal Gangadhar Tilak In Hindi बाल गंगाधर तिलक अपने पिता की मृत्यु के बाद 16 वर्ष की उम्र में अनाथ हो गए। उन्होंने तब भी बिना किसी व्यवधान के अपनी शिक्षा जारी रखी और अपने पिता की मृत्यु के चार महीने के अंदर मैट्रिक की परीक्षा पास कर ली।
https://1.bp.blogspot.com/-Wmh6DXa52ds/XFqRJ5mQbLI/AAAAAAAABis/RZoxpaYix_UuHUH8C03Ns_4-_ptJY0xWgCLcBGAs/s400/Bal-Gangadhar-Tilak-In-Hindi.jpg
https://1.bp.blogspot.com/-Wmh6DXa52ds/XFqRJ5mQbLI/AAAAAAAABis/RZoxpaYix_UuHUH8C03Ns_4-_ptJY0xWgCLcBGAs/s72-c/Bal-Gangadhar-Tilak-In-Hindi.jpg
StoryBookHindi
https://www.storybookhindi.com/2019/02/Bal-gangadhar-tilak-in-Hindi.html
https://www.storybookhindi.com/
https://www.storybookhindi.com/
https://www.storybookhindi.com/2019/02/Bal-gangadhar-tilak-in-Hindi.html
true
6125064977958501049
UTF-8
Loaded All Posts Not found any posts VIEW ALL Readmore Reply Cancel reply Delete By Home PAGES POSTS View All RECOMMENDED FOR YOU LABEL ARCHIVE SEARCH ALL POSTS Not found any post match with your request Back Home Sunday Monday Tuesday Wednesday Thursday Friday Saturday Sun Mon Tue Wed Thu Fri Sat January February March April May June July August September October November December Jan Feb Mar Apr May Jun Jul Aug Sep Oct Nov Dec just now 1 minute ago $$1$$ minutes ago 1 hour ago $$1$$ hours ago Yesterday $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago more than 5 weeks ago Followers Follow THIS CONTENT IS PREMIUM Please share to unlock Copy All Code Select All Code All codes were copied to your clipboard Can not copy the codes / texts, please press [CTRL]+[C] (or CMD+C with Mac) to copy