भानगढ़ किला - Bhangarh Fort Horror Story

भानगढ़ किला - Bhangarh Fort Horror Story

Horror Place In Rajasthan 



भानगढ़ किला - Bhangarh Fort




भानगढ़ किला भारत के राजस्थान राज्य में बना 17 वीं शताब्दी का किला है।
इसे भगवंत दास ने अपने छोटे बेटे माधो सिंह के लिए बनवाया था।
किला और इसके पूर्ववर्ती क्षेत्र अच्छी तरह से संरक्षित हैं।
पता: गोला का बास, राजगढ़ तहसील, अलवर, भानगढ़, 
राजस्थान 301410
साल का निर्माण: 1631



 ये किला है राजस्थान के अलवर जिले में स्थित भानगढ़ का किला । अगर यहां के स्थानीय लोगों की माने तो यहां आने के बाद पर्यटक आज भी एक अलग तरह के डर और बेचैनी का अनुभव करते हैं।


भानगढ़ किला देखने में जितना शानदार है उसका अतीत उतना ही भयानक है। ये किला उनके लिए है जो रोमांच के शौक़ीन है और डर पर अपनी जीत दर्ज करना जानते हैं। अगर आप डर को जीतने का साहस रखते हैं तो एक बार जरूर यहाँ जाएं।


यह किला अम्बेर के महान मुगल सेनापति, मान सिंह के बेटे माधो सिंह द्वारा 1613 में बनवाया गया था। राजा माधो सिंह अकबर की सेना के जनरल थे। ये किला जितना शानदार है उतना ही विशाल भी है, वर्तमान में ये किला एक खंडहर में तब्दील हो गया है।

किले में प्राकृतिक झरने, जलप्रपात, उद्यान, हवेलियां और बरगद के पेड़ इस किले की गरिमा को और भी अधिक बढ़ाते हैं। साथ ही भगवान सोमेश्वर, गोपीनाथ, मंगला देवी और केशव राय के मंदिर धर्म की दृष्टि से भी इसे महत्त्वपूर्ण बनाते हैं।

भानगढ़ की राजकुमारी रत्‍नावती जो बेहद खुबसुरत थी और उनके रूप की चर्चा पूरे राज्‍य में थी वो एक तांत्रिक की मौत का कारण बनी क्योंकि तांत्रिक राजकुमारी से विवाह करना चाहता था। राजकुमारी से विवाह न होने के कारण उसने अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। 

मरने से पहले भानगढ़ को तांत्रिक से ये श्राप मिला क‍ि इस किले में रहने वालें सभी लोग जल्‍द ही मर जायेंगे और ताउम्र उनकी आत्‍माएं इस किले में भटकती रहेंगी।

उस तांत्रिक के मौत के कुछ दिनों बाद ही भानगढ़ और अजबगढ़ के बीच जंग हुई जिसमें किले में रहने वाले सारे लोग मारे गये। यहां तक की राजकुमारी रत्‍नावती भी उस श्राप से नहीं बच सकी और उनकी भी मौत हो गयी। तब से लेकर आज तक इस किले में रूहों ने अपना डेरा जमा रखा है।


भानगढ़ के सम्बन्ध में एक अन्य कहानी ये भी है क‍ि यहाँ एक तपस्वी बाबा बालानाथ और राजा अजब सिंह के बीच किसी बात को लेकर एक समझौता हुआ था, जिसे बाद में राजा ने नहीं माना और बाबा ने उसे श्राप दे दिया की इस किले में कोई भी जीवित नहीं रहेगा और जो यहां आयगा वो मार जायगा। 

तब से लेकर आज तक ये किला यूं ही वीरान पड़ा है और आज भी इसमें भूत हैं। लोगों का मानना है कि यही कारण था कि किले को इसके निर्माण के तुरन्त बाद ही छोड़ दिया गया था, और शहर प्रेतवाधित होने की वजह से सुनसान हो गया।


फिलहाल इस किले की देख रेख भारत सरकार द्वारा की जाती है। किले के चारों तरफ आर्कियोंलाजिकल सर्वे आफ इंडिया (एएसआई) की टीम मौजूद रहती हैं।

इस किले में आज भी आने वालों को तलवारों की आवाज और लोगों की चींखें सुनाई देती है। इसके अलांवा किले के भीतर कमरों में महिलाओं के रोने या फिर चूड़ियों के खनकने की भी आवाजें साफ सुनाई देती हैं। किले के पिछले हिस्‍सें में एक छोटा सा दरवाजा है जिसके पास बहुत अंधेरा रहता है। कई बार वहां किसी के बात करने की आवाज या एक विशेष प्रकार की गंध को भी लोगों ने महसूस किया है।


एएसआई ने सख्‍त हिदायत दे रखी है कि सूर्यास्‍त के बाद इस इलाके में कोई भी व्‍यक्ति न रुके। यहां तक की ये भी कहा जाता है क‍ि इस किले में सूर्यास्‍त के बाद जो भी गया वो फिर कभी भी वापस नहीं आया। ये तक कहा गया है की यहां आने वालों को कई बार रूहों द्वारा परेशान किया गया है और कुछ लोगों को अपनी जान तक से हाथ धोना पड़ा है।


भानगढ़ जाने वाले पास के ही हनुमान मंदिर अवश्य जाएं। पौराणिक मान्यता है कि कभी कोई यहां से खाली हाथ नहीं गया और श्री राम भक्त हनुमान आने वाले फरयादियों की सभी मनोकामना पूरी करते हैं।
अब इसे अंधविश्वास कहें या कुछ और यहां आज तक जो भी आया है उसे न जाने क्यों एक अजीब से दर की अनुभूति होती है जैसे ही वो किले में प्रवेश करता है।

भले ही आज इस किले को भूतिया और वीरान कहा जाता है लेकिन अगर यहां आने वाले इसकी वास्तुकला को गौर से देखें तो उन्हें एहसास होगा कि इसकी खूबसूरती बेमिसाल है और ये किसी का भी मन मोह सकती है।
भानगढ़ किला देखने में जितना शानदार है उसका अतीत उतना ही भयानक है। ये किला उनके लिए है जो रोमांच के शौक़ीन है और डर पर अपनी जीत दर्ज करना जानते हैं। अगर आप डर को जीतने का साहस रखते हैं तो एक बार जरूर यहाँ जाएं।


कहा जाता है कि जिस समय इस किले का निर्माण हुआ उस समय सभी इसकी सुंदरता पर मोहित हो उठे। इस किले को बनाते वक़्त इस बात का पूरा ध्यान रखा गया था कि दुश्मनों से क्षेत्र की सम्पूर्ण सुरक्षा हो सके।
यह किला अम्बेर के महान मुगल सेनापति,मान सिंह के बेटे माधो सिंह द्वारा 1613 में बनवाया गया था। राजा माधो सिंह अकबर की सेना के जनरल थे। ये किला जितना शानदार है उतना ही विशाल भी है, वर्तमान में ये किला एक खंडहर में तब्दील हो गया है।






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