Top 5 भगत सिंह की कविता | republic day special Bhagat Singh Poetry

Top 5 भगत सिंह की कविता 
Republic Day Special | Bhagat Singh Poetry 



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Bhagat Singh Poetry
republic day special


भगत सिंह एक भारतीय राष्ट्रवादी थे जिन्हें भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के सबसे प्रभावशाली क्रांतिकारियों में से एक माना जाता था। उन्हें अक्सर भारतीय भाषाओं में "शहीद" शब्द "शहीद" शहीद भगत सिंह के रूप में जाना जाता है।

जन्म: 28 सितंबर 1907, बंगा, पाकिस्तान
निधन: 23 मार्च 1931, लाहौर, पाकिस्तान
माता-पिता: विद्यावती, सरदार किशन सिंह संधू
शिक्षा: नेशनल कॉलेज, लाहौर, नेशनल कॉलेज ऑफ़ आर्ट्स, दयानंद एंग्लो-वैदिक स्कूल सिस्टम
भाई-बहन: बीबी अमर कौर, कुलतार सिंह, राजिंदर सिंह,

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1. पहला चिंतक था पंजाब का | Bhagat Singh Poetry



पहला चिंतक था पंजाब का
सामाजिक संरचना पर जिसने
वैज्ञानिक नजरिए से विचार किया था
पहला बौद्धि‍क
जिसने सामाजिक विषमताओं की, पीड़ा की
जड़ों तक पहचान की थी
पहला देशभक्‍त
जिसके मन में
समाज सुधार का
ए‍क निश्चित दृष्टिकोण था
पहला महान पंजाबी था वह
जिसने भावनाओं व बुद्धि‍ के सामंजस्‍य के लिए
धुंधली मान्‍यताओं का आसरा नहीं लिया था
ऐसा पहला पंजाबी
जो देशभक्ति के प्रदर्शनकारी प्रपंच से
मुक्‍त हो सका
पंजाब की विचारधारा को उसकी देन
सांडर्स की हत्‍या
असेम्‍बली में बम फेंकने और
फांसी के फंदे पर लटक जाने से कहीं अधिक है
भगत सिंह ने पहली बार
पंजाब को
जंगलीपन, पहलवानी व जहालत से
बुद्धि‍वाद की ओर मोड़ा था
जिस दिन फांसी दी गई
उसकी कोठरी में
लेनिन की किताब मिली
जिसका एक पन्‍ना मोड़ा गया था
पंजाब की जवानी को
उसके आखिरी दिन से
इस मुड़े पन्‍ने से बढ़ना है आगे
चलना है आगे.

2. सख़तियों से बाज़ आ ओ आकिमे बेदादगर | Bhagat Singh Poetry

सख़तियों से बाज़ आ ओ आकिमे बेदादगर,
दर्दे-दिल इस तरह दर्दे-ला-दवा हो जाएगा ।
बाएसे-नाज़े-वतन हैं दत्त, भगत सिंह और दास,
इनके दम से नखले-आज़ादी हरा हो जाएगा ।
तू नहीं सुनता अगर फर्याद मज़लूमा, न सुन,
मत समझ ये भी बहरा ख़ुदा हो जाएगा ।
जोम है कि तेरा कुछ नहीं सकते बिगाड़,
जेल में गर मर भी गए तो क्या हो जाएगा ।
याद रख महंगी पड़ेगी इनकी कुर्बानी तुझे,
सर ज़मीने-हिन्द में महशर बपा हो जाएगा ।
जां-ब-हक हो जाएंगे शिद्दत से भूख-ओ-प्यास की,
ओ सितमगर जेलख़ाना कर्बला हो जाएगा ।
ख़ाक में मिल जाएगा इस बात से तेरा वकार,
और सर अकवा में नीचा तेरा हो जाएगा ।
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3. भारत के लिये तू हुआ बलिदान भगत सिंह | Bhagat Singh Poetry


भारत के लिये तू हुआ बलिदान भगत सिंह ।
था तुझको मुल्को-कौम का अभिमान भगत सिंह ।।
वह दर्द तेरे दिल में वतन का समा गया ।
जिसके लिये तू हो गया कुर्बान भगत सिंह ।।
वह कौल तेरा और दिली आरजू तेरी ।
है हिन्द के हर कूचे में एलान भगत सिंह ।
फांसी पै चढ़के तूने जहां को दिखा दिया ।
हम क्यों न बने तेरे कदरदान भगत सिंह ।।
प्यारा न हो क्यों मादरे-भारत के दुलारे ।
था जानो-जिगर और मेरी शान भगत सिंह ।।
हरएक ने देखा तुझे हैरत की नजर से ।
हर दिल में तेरा हो गया स्थान भगत सिंह ।।
भूलेगा कयामत में भी हरगिज न ए ‘किशोर’ ।
माता को दिया सौंप दिलोजान भगत सिंह ।।

4. ज़िंदा-बाश ऐ इंक़लाब ऐ शोला-ए-फ़ानूस-ए-हिन्द


ज़िंदा-बाश ऐ इंक़लाब ऐ शोला-ए-फ़ानूस-ए-हिन्द
गर्मियाँ जिस की फ़रोग़-ए-मंक़ल-ए-जाँ हो गईं
बस्तियों पर छा रही थीं मौत की ख़ामोशियाँ
तू ने सूर अपना जो फूँका महशरिस्ताँ हो गईं
जितनी बूँदें थीं शहीदान-ए-वतन के ख़ून की
क़स्र-आज़ादी की आराइश का सामाँ हो गईं
मर्हबा ऐ नौ-गिरफ़्तारान-ए-बेदाद-ए-फ़रंग
जिन की ज़ंजीरें ख़रोश-अफ़ज़ा-ए-ज़िंदाँ हो गईं
ज़िंदगी उन की है दीन उन का है दुनिया उन की है
जिन की जानें क़ौम की इज़्ज़त पे क़ुर्बां हो गईं

5. डरे न कुछ भी जहां की चला चली से हम | Bhagat Singh 


डरे न कुछ भी जहां की चला चली से हम
अगर भगत सिंह और दत्त मर गएबम चख़ है
अपनी शाहे रईअत पनाह सेज़िंदा-बाश ऐ इंक़लाब ऐ शोला-ए-फ़ानूस-ए-हिन्द
हिन्दोसतानतेईस मार्च कोमरते मरते
भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु के बलिदान
मिटने वालों की वफा का यह सबक याद रहे
भगत सिंह-पंडित हर्ष दत्त पांडेभगत सिंह की याद
खून का आंसूमर्दाना भगत सिंहप्यारा भगत सिंहजल्लाद सेतीन शहीदखून के छींटेफांसी के शहीदऐलान


Happy Republic Day 
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Jai Ho *
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