राहत इंदौरी शायरी - Rahat Indori Shayari in Hindi

राहत इंदौरी शायरी- 
Rahat Indori Shayari in Hindi



Rahat Indori Shayari in Hindi
रहत इंदौरी शायरी- Rahat Indori Shayari in Hindi



राहत इंदौरी ( Poet )



Rahat Indori सबसे चर्चित सेलिब्रिटी उर्दू कवि और Bollywood गीतकार हैं। इससे पहले, वह इंदौर विश्वविद्यालय में उर्दू साहित्य के अध्येता थे। राहत इंदौरी अपनी काव्य प्रतिभा के लिए दुनिया भर में अपने लाखों प्रशंसकों के बीच बहुत प्रसिद्ध हैं और पसंद करते हैं और आशालरों को प्रस्तुत करने की एक बहुत अजीब शैली है। 

जन्म: 1 जनवरी 1950 (आयु 69 वर्ष), Indoor
शिक्षा: बरकतुल्लाह विश्वविद्यालय
पति / पत्नी: अंजुम रहबर (1988-1993), सीमा रहत
बच्चे: सतलज इंदौरी, समीर इंदौरी, शिबली इंदौरी, फैसल इंदौरी
माता-पिता: मकबूल अन निसा बेगम, रफतुल्लाह कुरैशी

राहत इंदौरी शायरी- Rahat Indori Shayari in Hindi




Rahat Indori Shayari in Hindi

-कश्ती तेरा नसीब चमकदार कर दिया-



कश्ती तेरा नसीब चमकदार कर दिया
इस पार के थपेड़ों ने उस पार कर दिया
अफवाह थी की मेरी तबियत ख़राब हैं
लोगो ने पूछ पूछ के बीमार कर दिया
 
रातों को चांदनी के भरोसें ना छोड़ना
सूरज ने जुगनुओं को ख़बरदार कर दिया
रुक रुक के लोग देख रहे है मेरी तरफ
तुमने ज़रा सी बात को अखबार कर दिया
 
इस बार एक और भी दीवार गिर गयी
बारिश ने मेरे घर को हवादार कर दिया
बोल था सच तो ज़हर पिलाया गया मुझे
अच्छाइयों ने मुझे गुनहगार कर दिया

दो गज सही ये मेरी मिलकियत तो हैं
ऐ मौत तूने मुझे ज़मीदार कर दिया ||


- Rahat Indori 




Rahat indori hindi poetry


-उसकी कत्थई आँखों में हैं जंतर मंतर सब-






उसकी कत्थई आँखों में हैं जंतर मंतर सब
चाक़ू वाक़ू, छुरियां वुरियां, ख़ंजर वंजर सब
जिस दिन से तुम रूठीं,मुझ से, रूठे रूठे हैं

चादर वादर, तकिया वकिया, बिस्तर विस्तर सब
मुझसे बिछड़ कर, वह भी कहां अब पहले जैसी है
फीके पड़ गए कपड़े वपड़े, ज़ेवर वेवर सब

जाने मैं किस दिन डूबूँगा, फिक्रें करते हैं
दरिया वरीया, कश्ती वस्ती, लंगर वंगर सब
इश्क़ विश्क़ के सारे नुस्खे, मुझसे सीखते हैं

सागर वागर, मंज़र वंजर, जोहर वोहर सब
तुलसी ने जो लिखा अब कुछ बदला बदला हैं
रावण वावण, लंका वंका, बन्दर वंदर सब







~Rahat Indori



राहत इंदौरी शायरी  Rahat Indori Shayari in Hindi

-सफ़र की हद है वहां तक की कुछ निशान रहे-



सफ़र की हद है वहां तक की कुछ निशान रहे
चले चलो की जहाँ तक ये आसमान  रहे
ये क्या उठाये कदम और आ गयी मंजिल

मज़ा तो तब है के पैरों में कुछ थकान रहे
वो शख्स मुझ को कोई जालसाज़ लगता हैं
तुम उसको दोस्त समझते हो फिर भी ध्यान रहे

मुझे ज़मीं की गहराइयों ने दबा लिया
मैं चाहता था मेरे सर पे आसमान रहे
अब अपने बिच मरासिम नहीं अदावत है

मगर ये बात हमारे ही दरमियाँ रहे
सितारों की फसलें उगा ना सका कोई
मेरी ज़मीं पे कितने ही आसमान रहे

वो एक सवाल है फिर उसका सामना होगा
दुआ करो की सलामत मेरी ज़बान रहे ||

~ Rahat Indori 

I Hope You Like The राहत इंदौरी शायरी - 
Rahat Indori Shayari in Hindi
Stay Connected With StoryBookHindi
Daily Updates.



Post a Comment

0 Comments