2 कहानी - अकबर बीरबल की कहानियां - Akbar birbal ki kahaniyan

2 कहानी - 
अकबर बीरबल की कहानियां - 
Akbar birbal ki kahaniyan





अकबर कौन ह ै?


अबू-फाथ जलाल-उद-दीन मुहम्मद अकबर ابو الفتح جلال الدين محمد اكبر, जिसे अकबर द के रूप में जाना जाता है, अकबर द ग्रेट के रूप में भी जाना जाता है, तीसरा मुगल सम्राट था, जिसने 1556 से 1605 तक शासन किया था। 
पैदा हुआ: 15 अक्टूबर 1542, उमरकोट, पाकिस्तान
मर गया: 27 अक्टूबर 1605, फतेहपुर सीकरी
पूरा नाम: अबू-फाथ जलाल उद-दीन मुहम्मद अकबर I
जीवनसाथी: मरियम-उज़-ज़मानी (एम। 1562-1605), और अधिक
बच्चे: जहांगीर, दैन्याल मिर्जा, मुराद मिर्जा, और अधिक
माता-पिता: हुमायूं, हामिदा बनू बेगम

बीरबल कौन है ?

बीरबल, या राजा बीरबल, मुगल सम्राट अकबर के दरबार में एक हिंदू ब्राह्मण सलाहकार थे। वह ज्यादातर भारतीय उपमहाद्वीप में लोक कथाओं के लिए जाने जाते हैं जो उनके बुद्धि पर ध्यान केंद्रित करते हैं। 1556-1562 में अकबर द्वारा एक कवि और गायक के रूप में बीरबल नियुक्त किया गया था। 
पैदा हुआ: 1528, उत्तर प्रदेश
मर गया: 1586, स्वात जिला, पाकिस्तान 
पूरा नाम: महेश दास उपनाम: बीरबल 
राष्ट्रीयता: भारतीय 

माता-पिता: गंगा दास, अनाभा डेविटो




अकबर बीरबल की कहानियां Akbar birbal ki kahaniyan
अकबर बीरबल की कहानियां

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रेत और चीनी - 
Akbar Birbal Hindi Kahani




बादशाह अकबर के दरबार की कार्यवाही चल रही थे, तभी एक दरबारी हाथ में शीशे का एक मर्तबान लिए वहां आया। बादशाह ने पूछा- 'क्या है इस मर्तबान में?'

दरबारी बोला- 'इसमें रेत और चीनी का मिश्रण है।'
'वह किसलिए' - फिर पूछा बादशाह अकबर ने।
'माफी चाहता हूं हुजूर' - दरबारी बोला। 'हम बीरबल की काबिलियत को परखना चाहते हैं, हम चाहते हैं की वह रेत से चीनी का दाना-दाना अलग कर दे।'

बादशाह अब बीरबल से मुखातिब हुए, - 'देख लो बीरबल, रोज ही तुम्हारे सामने एक नई समस्या रख दी जाती है, अब तुम्हे बिना पानी में घोले इस रेत में से चीनी को अलग करना है।'
'कोई समस्या नहीं जहांपनाह' - बीरबल बोले। यह तो मेरे बाएं हाथ का काम है, कहकर बीरबल ने मर्तबान उठाया और चल दिया दरबार से बाहर !

बीरबल बाग में पहुंचकर रुका और मर्तबान में भरा सारा मिश्रण आम के एक बड़े पेड़ के चारों और बिखेर दिया- 'यह तुम क्या कर रहे हो?' - एक दरबारी ने पूछा
बीरबल बोले, - 'यह तुम्हे कल पता चलेगा।'

अगले दिन फिर वे सभी उस आम के पेड़ के नीचे जा पहुंचे, वहां अब केवल रेत पड़ी थी, चीनी के सारे दाने चीटियां बटोर कर अपने बिलों में पहुंचा चुकी थीं, कुछ चीटियां तो अभी भी चीनी के दाने घसीट कर ले जाती दिखाई दे रही थीं!

'लेकिन सारी चीनी कहां चली गई?' दरबारी ने पूछा
'रेत से अलग हो गई' - बीरबल ने कहा।
सभी जोर से हंस पड़ें,
बादशाह ने दरबारी से कहा कि अब तुम्हें चीनी चाहिए तो चीटियों के बिल में घुसों।'
सभी ने जोर का ठहाका लगाया और बीरबल की अक्ल की दाद दी।




बीरबल कहां मिलेगा -
Akbar Birbal Hindi kahani



 

एक दिन बीरबल बाग में टहलते हुए सुबह की ताजा हवा का आनंद ले रहे था कि अचानक एक आदमी उनके पास आकर बोला, 'क्या आप मुझे बता सकते हो कि बीरबल कहां मिलेगा?’
'बाग में।' बीरबल बोला।




वह आदमी थोड़ा सकपकाया लेकिन फिर संभलकर बोला, 'वह कहां रहता है?’
'अपने घर में।' बीरबल ने उत्तर दिया।
हैरान-परेशान आदमी ने फिर पूछा, 'तुम मुझे उसका पूरा पता ठिकाना क्यों नहीं बता देते?’

'क्योंकि तुमने पूछा ही नहीं।' बीरबल ने ऊंचे स्वर में कहा।
'क्या तुम नहीं जानते कि मैं क्या पूछना चाहता हूं?' उस आदमी ने फिर सवाल किया।
'नहीं।’ बीरबल का जवाब था।

वह आदमी कुछ देर के लिए चुप हो गया, बीरबल का टहलना जारी था। उस आदमी ने सोचा कि मुझे इससे यह पूछना चाहिए कि क्या तुम बीरबल को जानते हो? वह फिर बीरबल के पास जा पहुंचा, बोला, 'बस, मुझे केवल इतना बता दो कि क्या तुम बीरबल को जानते हो?’
'हां, मैं जानता हूं।' जवाब मिला।

'तुम्हारा क्या नाम है?' आदमी ने पूछा।
'बीरबल।' बीरबल ने उत्तर दिया।
अब वह आदमी भौचक्का रह गया। वह बीरबल से इतनी देर से बीरबल का पता पूछ रहा था और बीरबल था कि बताने को तैयार नहीं हुआ कि वही बीरबल है। 

उसके लिए यह बेहद आश्चर्य की बात थी।
'तुम भी क्या आदमी हो…' कहता हुआ वह कुछ नाराज-सा लग रहा था, 'मैं तुमसे तुम्हारे ही बारे में पूछ रहा था और तुम न जाने क्या-क्या ऊटपटांग बता रहे थे। 

बताओ, तुमने ऐसा क्यों किया?’
'मैंने तुम्हारे सवालों का सीधा-सीधा जवाब दिया था, बस!’
अंततः वह आदमी भी बीरबल की बुद्धि की तीक्ष्णता देख मुस्कराए बिना न रह सका।



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अकबर बीरबल की कहानियां -
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