अल्बर्ट आइंस्टीन जीवनी - Albert Einstein Biography in Hindi

अल्बर्ट आइंस्टीन जीवनी - Albert Einstein Biography in Hindi



Albert Einstein एक जर्मन जन्मे सैद्धांतिक भौतिक विज्ञानी थे जिन्होंने आधुनिक भौतिकी के दो स्तंभों में से एक, सापेक्षता का सिद्धांत विकसित किया। उनका काम विज्ञान के दर्शन पर इसके प्रभाव के लिए भी जाना जाता है। 

पैदा हुआ: 14 मार्च 1879, उलम, जर्मनी
मर गया: 18 अप्रैल 1955, न्यू जर्सी, संयुक्त राज्य अमेरिका के प्लेेंसबोरो में प्रिंसटन मेडिकल सेंटर
शिक्षा: ज़्यूरिख विश्वविद्यालय (1905), ईटीएच ज्यूरिख (1896-1900), और अधिक
जीवनसाथी: एल्सा आइंस्टीन (एम। 1919 -1936), माइलवा मारिक (एम। 1903-1919)



कल्पना ज्ञान से ज्यादा महत्वपूर्ण है।
जीवन साइकिल की सवारी करने जैसा है। अपना संतुलन बनाये रखने आपको अवश्य ही चलते रहना चाहिए।
दो चीजें अनंत हैं: ब्रह्मांड और मानव मूर्खता; और मैं ब्रह्मांड के बारे में निश्चित नहीं हूँ।


Albert Einstein Biography in Hindi
Albert Einstein Biography in Hindi


आधुनिक भौतिक विज्ञान के जन्मदाता अल्बर्ट आइन्स्टाइन ने भौतिक विश्व को उसके यतार्थ स्वरूपों में ही समझने का प्रयास किया था।
इस सम्बन्ध में उन्होंने कहा था कि “शब्दों का भाषा को जिस रूप में लिखा या बोला जाता है मेरी विचार पद्दति में उनकी उस रूप में कोई भूमिका नही है। पारम्परिक शब्दों अथवा अन्य चिन्हों के लिए दुसरे चरण में मात्र तब परिश्रम करना चाहिए जब सम्बंधिकरण का खेल फिर से दोहराया जा सके ”।


• प्रारम्भिक जीवन

अल्बर्ट आइन्स्टाइन का जन्म 14 मार्च 1879 को जर्मनी के उल्क नामक छोटे से कस्बे में हुआ था।
उनके पिता का नाम हर्मन आइन्स्टाइन और माता का नाम पौलिन था।
पौलीन को अपने पुत्र से बहुत प्यार था और कभी वो उसको अपने से दूर नही करती थी।
एल्बर्ट तीन वर्ष का हुआ तो उसकी माता के लिए एक समस्या खडी हो गयी कि वो बोलता नही था। सामान्यत: तीन वर्ष के बालक तुतलाकर बोलना सीख जाते है। फिर भी माँ ने उम्मीद नही छोडी और उसे पियानो बजाना सिखाया।
बचपन में एल्बर्ट शांत स्वाभाव का और शर्मीला बच्चा था और उसका कोई मित्र नही था। वह अपने पडोस में रहने वाले बच्चो के साथ भी खेलना पसंद नही करता था।

एल्बर्ट के माता -पिता म्यूनिख रहने लगे थे। बच्चे म्यूनिख की सडको पर सेना की परेड को देखकर उनकी नकल उतारा करते थे जबकि अल्बर्ट सिपाहियों को देखते ही रोने लगता था।
उस समय दुसरे सभी बच्चे बड़ा होकर सिपाही बनने की बात करते थे लेकिन उसकी सिपाही बनने में कोइ रूचि नही थी।

अब एल्बर्ट पांच वर्ष का हो गया था और उसके जन्मदिन पर उसके माता-पिता ने मैग्नेटिक कम्पस उपहार में दिया जिसे देखकर वो बहुत प्रसन्न हुआ था। जब उस मैग्नेटिक कम्पस की सुई हमेशा उत्तर दिशा की तरफ रहती तो उसके दिमाग में प्रश्न आते थे कि ऐसा कैसे और क्यों होता है।
अल्बर्ट बचपन से ही पढने लिखने में होशियार था लेकिन शिक्षको के साथ उसका तालमेल नही बैठता था क्योंकि वो रटंत विद्या सीखाते थे।

अल्बर्ट इसाई नही यहूदी था जिसके कारण स्कूल में इसाई लडके उसे परेशान करते थे इसी वजह से उसके दिमाग में अकेलेपन की भावना आ गयी थी।
उसका बचपन में एक ही मित्र बना था जिसका नाम मैक्स टेमले था जिससे वो अपने मन की बाते करता था और तर्कसंगत प्रश्न करता रहता था।


एक दिन अल्बर्ट ने मैक्स से पूछा कि “ये ब्रह्मांड कैसे काम करता है ” इसका उत्तर मैक्स के पास नहीं था। इस तरह बचपन से उसका भैतिकी में बहुत रूचि रही थी।


एल्बर्ट के चाचा जैकब एक इंजिनियर थ जिन्होंने अल्बर्ट के मन में गणित के प्रति रूचि दिखाई थी। उन्होंने उसे सिखाया था कि जब भी बीजगणित में कुछ अज्ञात वस्तु को ढूँढना चाहते है तो उसे बीजगणित में X मान लेते है और तब तक ढूंढते रहते है जब तक कि पता नही लगा लेते है।


एल्बर्ट जब 15 वर्ष का हुआ तो उसके पिता के कारोबार में समस्याए आ गयी जिसके कारण उन्हें कारोबार बंद करना पड़ा। अब उसके माता पिता उसको जिम्नेजियम स्कूल में दाखिला दिलाकर नौकरी की तलाश में दुसरे शहर चले गये।

अब माता पिता के जाने के बाद अल्बर्ट उदास रहने लगा और उसका पढाई में ध्यान नही लगा इसलिए वो भी अपने परिवार के पास इटली चला गया।

इटली में उसने बहुत सुखद समय बिताया उसके बाद सोलह वर्ष की उम्र में अल्बर्ट को स्विज़रर्लैंड के एक स्कूल में पढने के लिए रखा गया। यहा पर उसने भौतिकी में गहरी रूचि दिखाना शुरू कर दिया और उसे योग्य अध्यापक भी मिले। यही पर उन्होंने सापेक्षता का सिद्धांत का पता लगाया था। एल्बर्ट ने ज्यूरिख से स्नातक की डिग्री प्राप्त की थी।


• अल्बर्ट आइन्स्टाइन अध्यापक के रूप में


स्नातक की डिग्री लेने के बाद उन्होंने विद्यार्थियों को पढ़ाने के बारे में विचार किया लेकिन अल्बर्ट के अधिक ज्ञान की वजह से प्रारम्भ में उन्हें नौकरी नही मिली।

सन 1902 में अल्बर्ट आइन्स्टाइन को स्विज़रलैंड के बर्न शहर में एक अस्थाई नौकरी मिल गयी। अब उन्हें अपने शोध लेखो को लिखने और प्रकाशित कराने का बहुत समय मिला।

उन्होंने डॉक्टरेट की डिग्री प्राप्त करने के लिए मेहनत करना शुरू कर दिया और अंत में उन्हें डाक्टरेट की उपाधि मिल ही गयी।



• अल्बर्ट आइन्स्टाइन वैज्ञानिक के रूप में

ज्यूरिख विश्वविद्यालय में उनको प्रोफेसर की नियुक्ति मिली और लोगो ने उन्हें महान वैज्ञानिक मानना शुरू कर दिया।
सं 1905 में 26 वर्ष की आयु में उन्होंने सापेशिकता का सिद्धांत प्रतिपादित किया जिसने उन्हें विश्वविख्यात कर दिया।


इस विषय पर उन्होंने केवल चार लेख लिखे थे जिन्होंने भौतिकी का चेहरा बदल दिया। इस सिद्धांत का प्रसिद्ध समीकरण E=mc2 है जिसके कारण ही परमाणु बम बन सका। इसी के कारण इलेक्ट्रिक ऑय की बुनियाद रखी गयी। इसी के कारण ध्वनि चलचित्र और टीवी पर शोध हो सके।
आइन्स्टाइन को अपनी इसी खोज के लिए विश्व प्रसिद्ध नोबल पुरुस्कार मिला था।

सारा संसार आइन्स्टाइन की प्रशंशा करने लगा और जगह जगह पर समारोह आयोजित किये जाने लगे। इतना सब कुछ होने के बाद भी वो हमेशा नम्रता से रहते थे।
आइन्स्टाइन विश्व शान्ति और समानता में विश्वास रखते थे इसी कारण उन्हें गांधीजी की तरह महान पुरुष कहा जाता था।

आइन्स्टाइन को अपने जीवन में सबसे ज्यादा दुःख तब हुआ जब उनके वैज्ञानिक अविष्कारों के कारण बाद में परमाणु बम का आविष्कार हुआ था जिससे हिरोशिमा और नागासाकी जैसे नगर ध्वस्त हो गये थे।


• आइन्स्टाइन का परिवार

1903 में अल्बर्ट आइन्स्टाइन का विवाह मिलवा मैरिक हे हुआ था।
उनके यहा दो पुत्रो एल्बर्ट और एडूआई ने जन्म लिया था।
आइन्स्टाइन के विवाह से पहले भी के पुत्री थी जिसे आइन्स्टाइन ने गोद लिया था लेकिन उसकी बचपन में ही मौत हो गयी थी।

14 फरवरी 1919 ने उनका मैरिक से तलाक हो गया और इसी वर्ष में उन्होंने दुसरी शादी कर ली थी। उनकी दुसरी पत्नी का नाम एलसा था लेकिन वो भी 1936 में चल बसी। वैसे भी उनकी पारिवारिक जीवन में रूचि कम थी और अपना ज्यादातर समय अपनी वैज्ञानिक खोजो में लगाते थे।



• आइन्स्टाइन की मृत्यु

18 अप्रैल 1955 में महान वैज्ञानिक अल्बर्ट आइन्स्टाइन की अमेरिका के न्यू जर्सी शहर में मृत्यु हो गयी।
वह अपने जीवन एक अंत तक कार्य करते रहे उअर मानवता की भलाई में उन्होंने अपना जीवन समर्पित कर दिया था।

इतना सब होने के बाद भी वो किसी के घनिष्ट मित्र नही बन सके क्योंकि उनका लक्ष्य हमेशा सृष्टि को जानने का रहा था। आइन्स्टाइन की प्रतिभा से प्रभवित होने के कारण मृत्यु के बाद उनके दिमाग का अध्यययन किया गया लेकिन कुछ विशेष तथ्य हाथ नही आये।



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